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बिना संप्रभुता के राजा थे रियासतों के शासक : SC

नई दिल्ली/एजेंसी
आजादी के बाद भारतीय गणतंत्र में विलय करने वाली रियासतों के उत्तराधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। यूपी के रामपुर की रियासत के शासक की निजी संपत्ति उनके सभी वारिसों में बांटे जाने का फैसला शीर्ष अदालत ने दिया है। इसके साथ ही अहम टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय संघ में विलय के बाद रियासतों के शासक ‘प्रजा’, संप्रभुता और राज्य के बगैर ‘महाराजा’ थे। उनकी निजी संपत्ति को ‘गद्दी’ या शासन से जुड़ा हुआ नहीं माना जा सकता।



उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह सवाल रखा गया था कि भारतीय संघ में विलय के समझौते के बाद किसी रियासत के शासक की निजी संपत्ति का उत्तराधिकार ‘गद्दी’ के उत्तराधिकारी से तय होगा या शासक के पर्सनल लॉ के मुताबिक तय होगा। बेंच रामपुर के शासक नवाब रजा अली खान की निजी संपत्तियों के उत्तराधिकार को लेकर हुए विवाद पर सुनवाई कर रही थी। रामपुर का भारत में विलय 15 मई 1949 को हुआ था। पीठ से अपील की गई कि नवाब की निजी संपत्तियों को किसी आम आदमी की निजी संपत्ति की तरह नहीं माना जा सकता क्योंकि वे ‘गद्दी’ से जुड़े हुए थे। इसलिए संपत्ति ‘सबसे वरिष्ठ पुरुष उत्तराधिकारी’ को दिया जाएगा और इसमें अन्य को हिस्सेदारी नहीं मिलेगी। पीठ ने इस तर्क को खारिज कर दिया और फैसला दिया कि इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) ऐप्लीकेशन ऐक्ट, 1937 लागू होगा और चूंकि नवाब रजा अली खान शिया थे। इसलिए मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक उनकी संपत्ति उनके वारिसों को सौंपी जाएगी।

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