क्रिकेट खेल

सचिन तेंडुलकर से आगे निकल सकते हैं स्टीव स्मिथ : रोजर्स

चेन्नै/एजेंसी

जब से क्रिस रोजर्स ने एशेज 2015 के बाद टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा ऑस्ट्रेलियाई टीम उनका विकल्प नहीं तलाश पाई है। टीम प्रबंधन ने डेविड वॉर्नर के साथ तब से लेकर अभी तक 12 अलग-अलग खिलाड़ियों को आजमाया है। रोजर्स को लगता है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम जल्द ही ओपनिंग समस्या से छुटकारा पा लेगी।

उन्होंने मंगलवार को कहा, ‘मुझे लगता है कि अभी इस एक स्थान के लिए बहुत प्रतिस्पर्धा है और अगर आप अच्छा प्रदर्शन नहीं करते तो दूसरा खिलाड़ी आपका स्थान लेने के लिए तैयार है। मुझे लगता है कि हम सही ओपनिंग साझेदारी पाने के काफी करीब पहुंच चुके हैं। जिन खिलाड़ियों को हमने आजमाया है वे सभी अपने खेल को लगातार सुधार रहे हैं। जैसे-जैसे इन खिलाड़ियों में सुधार होता जाएगा कोई न कोई वॉर्नर का पक्का जोड़ीदार बन जाएगा।’

41 वर्षीय यह पूर्व बल्लेबाज एमआरएफ अकादमी में आई क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की 14 सदस्यी नैशनल परफॉर्मेंस टीम के मुख्य कोच हैं। यह टीम यहां ढाई सप्ताह ट्रेनिंग करेंगे। रोजर्स को उम्मीद है कि पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले स्टीव स्मिथ अगर अपनी फॉर्म को बरकरार रख पाते हैं तो वह सर्वकालिक महान बल्लेबाजों जैसे सचिन तेंडुलकर से आगे निकल सकते हैं।

रोजर्स ने कहा, ‘वह (स्मिथ) चोटी के बल्लेबाजों में शामिल हैं। मैं खुद को खुशकिस्मत समझता हूं जिसने तेंडुलकर, विराट कोहली और एबी डि विलियर्स के खिलाफ खेला है और स्टीव उस लीग में शामिल हैं। अगर वह इसी फॉर्म में खेलते रहें तो वे इनसे आगे निकल सकते हैं।’

ऑस्ट्रेलिया के लिए 25 टेस्ट मैच खेलने वाले रोजर्स को यकीन है कि एशेज के पहले टेस्ट में 8 और 7 रन की पारियां खेलने वाले कैमरन बैंक्रॉफ्ट लॉर्ड्स में होने वाले दूसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा, ‘हालिया वक्त में बैंक्रॉफ्ट अच्छी फॉर्म में थे। वह अपने प्रदर्शन के दम पर ऑस्ट्रेलियाई टीम में वापस आए हैं। लॉर्ड्स में कई बार विकेट बल्लेबाजों के लिए मुफीद हो सकता है। तो अगर वह आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करें तो वह अच्छे रन बना सकते हैं।’

रोजर्स ने इंग्लैंड में मिडलसेक्स, डर्बीशर और लीस्टरशर जैसी काउंटी के लिए क्रिकेट खेला है। उन्हें लगता है कि इंग्लैंड में फ्रंट फुट पर खेलने वाले बल्लेबाज अधिक कामयाब होते हैं। उन्होंने कहा, ‘फ्रंटफुट पर खेलने का हुनर सीखना इंग्लैंड में कामयाबी का मंत्र है। ऑस्ट्रेलिया में हमें बैकफुट पर रन बनाने की आदत होती है और यही कारण है कि हमारे कुछ खिलाड़ी इंग्लिश परिस्थितियों के अनुसार अपने खेल को ढालने में संघर्ष करते नजर आते हैं। काउंटी में खेलने से बल्लेबाजों को इसमें मदद मिलती है।’



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