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‘UN में थी पहली स्पीच, सुषमा ने कहा- यहां मर्जी नहीं चलेगी’

हाइलाइट्स
* मंगलवार को श्रद्धांजलि सभा में पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने सुषमा को किया याद
* पीएम ने संयुक्त राष्ट्र में अपने पहले भाषण का सुनाया किस्सा, कहा- मैं बिना पढ़े बोलने वाला था
* सुषमा ने कहा, अरे भाई! मर्जी नहीं चलेगी, रात को उन्होंने स्पीच तैयार कराई थी
* पीएम ने कहा, सुषमा का कहना था कि कुछ फोरम की अपनी मर्यादा होती है
* कहा, चुनाव नतीजे आने के बाद ही उन्होंने सरकारी मकान खाली कर दिया था
* बोले, वह मुझे जय श्रीकृष्ण कहती थीं, मैं उन्हें जय द्वारकाधीश कहता था
* 370 पर फैसले से वह काफी खुश थीं… खुशी-खुशी कृष्णों के चरणों में पहुंच गईं

नई दिल्ली/एजेंसी
पूर्व विदेश मंत्री के लिए आयोजित की गई श्रद्धांजलि सभा में पीएम मोदी ने कहा कि पीएम बनने के बाद पहला सबक उन्हें सुषमा स्वराज से ही मिला था। जहां सब लोगों ने सुषमा स्वराज के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया, वहीं पीएम मोदी ने उस समय का एक किस्सा सुनाया, जब वह पहली बार संयुक्त राष्ट्र में भाषण देने वाले थे। पीएम मोदी ने कहा, ‘यूएन में मेरा भाषण होना था, मैं पहली बार वहां जा रहा था। सुषमा जी मुझसे पहले पहुंच गई थीं। मैं जब वहां पहुंचा तो मुझे रिसीव करने के लिए वह गेट पर थीं। मैंने कहा कि कल सुबह मुझे बोलना है, इस पर चर्चा कर लेते हैं तो सुषमा जी ने पूछा कि आपका भाषण कहां है? मैंने कहा कि ऐसे ही बोल देंगे। उन्होंने कहा कि अरे भाई ऐसे नहीं होता है।’

मोदी ने कहा, ‘सुषमा जी ने मुझसे कहा कि ऐसा नहीं होता जी, दुनिया से भारत की बात करनी है, आप अपनी मर्जी से नहीं बोल सकते हैं। मैं पीएम था और वह विदेश मंत्रालय को संभालने वाली साथी मंत्री थीं, लेकिन वह मुझे कहती हैं कि अरे भई ऐसा नहीं होता है। मैंने कहा कि पढ़कर बोलना मेरे लिए मुश्किल होता है, मैं ऐसे ही बोल दूंगा। उन्होंने कहा कि जी नहीं। रात को ही उन्होंने मुझसे स्पीच तैयार कराई।’

पीएम ने बताया, ‘सुषमा जी का बड़ा आग्रह था कि आप कितने ही अच्छे वक्ता क्यों न हों, आपके विचारों में कितनी ही साध्यता क्यों न हो, लेकिन कुछ फोरम होते हैं, जिनकी अपनी मर्यादा होती हैं और वे आवश्यक होती हैं। यह सुषमा जी ने मुझे पहला सबक सिखा दिया था। कहने का मतलब यह है कि जिम्मेदारी जो भी हो, लेकिन जो आवश्यक है उसे बेरोकटोक कहना चाहिए।’ पीएम ने कहा कि सब लोग कहते हैं कि सुषमा जी मृदु थी, नम्र थी, लेकिन इसके साथ ही जरूरत पड़ती थी वह कटु बोलने से भी पीछे नहीं हटती थीं।

जब चुनाव न लड़ने का लिया फैसला
पीएम ने कहा कि इस बार उन्होंने (सुषमा) चुनाव न लड़ने का फैसला किया। एक बार उन्होंने पहले भी ऐसा किया था। तब मैं और वेंकैया जी उनसे मिले। उन्होंने मना किया, लेकिन जब उनसे कहा गया कि आप कर्नाटक जाइए और विशेष परिस्थिति में इस चुनाव में लड़िए। परिणाम करीब-करीब निश्चित था, लेकिन यह चुनौती भरा काम था, पार्टी के लिए उन्होंने यह काम किया। इस बार मैं उनको समझाता था कि सब संभाल लेंगे, लेकिन इस बार उन्होंने किसी की नहीं सुनी। वह अपने विचारों की पक्की थी।

नतीजे आते ही मकान किया खाली
पीएम ने कहा कि कोई सांसद जब सांसद नहीं रहता है, लेकिन सरकार को उसका मकान खाली कराने के लिए सालों तक नोटिस भेजना पड़ता है। सुषमा जी ने सब कुछ समेटने का तय कर लिया था। चुनाव परिणाम आए, उनका दायित्व पूरा हुआ तो उन्होंने पहला काम यह किया कि मकान खाली करके अपने निजी निवास पर चली गईं। मोदी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में ये सब चीजें बहुत कुछ कहती हैं।

पीएम से जय श्रीकृष्ण कहती थीं सुषमा
पीएम मोदी ने कहा कि उनका भाषण प्रभावी होने के साथ प्रेरक भी होता था। वे कृष्ण भक्ति को समर्पित थीं। हम जब भी मिलते थे वह मुझे जय श्रीकृष्ण कहती थीं, मैं उन्हें जय द्वारकाधीश कहता था, लेकिन कृष्ण का संकेत वह जीती थीं। उनके जीवन को देखें तो पता चलता है कि कर्मण्येवाधिकारस्ते क्या होता है।

पीएम ने कहा कि अब जीवन की विशेषता देखिए, उन्होंने सैकड़ों फोरम में जम्मू-कश्मीर की समस्या पर बोला होगा। आर्टिकल 370 पर बोला होगा, एक तरह से उसके साथ वह जी जान से जुड़ी थीं। जब जीवन का इतना बड़ा सपना पूरा होता है और खुशी समाती न हो… सुषमा जी के जाने के बाद जब मैं बांसुरी से मिला तो उन्होंने कहा कि इतनी खुशी-खुशी वह गईं हैं कि उसकी कल्पना करना मुश्किल है। एक प्रकार से उमंग से भरा मन नाच रहा था और उस खुशी के पल को जीते-जीते वह श्री कृष्ण के चरणों में पहुंच गईं।

सुषमा जी का हरियाणवी टच...
पीएम ने कहा कि सुषमा जी की एक खासियत थी, लेकिन यहां उसे बोलने की कोई हिम्मत नहीं कर रहा है शायद। वह मृदु थीं, नम्र थीं, ममता से भरी थीं, सब था, लेकिन कभी-कभी उनकी जुबान में हरियाणवी टच भी रहता था। हरियाणवी टच के साथ बात को फटाक से कहना और उससे टस से मस न होना भीतर से कन्विक्शन के रूप में प्रकट होता था। ये सार्वजनिक जीवन में बहुत कम होता है। अच्छी-अच्छी बात करने वाले लोग बहुत मिल जाते हैं लेकिन जब जरूरत पड़े तो कठोरतापूर्वक बोलना भी जरूरी है। मेरे लिए कोई क्या सोचेगा, यह सोचने की जगह सही निर्णय होना चाहिए, यह जरूरी है। इसके लिए कड़ाई के साथ हरियाणवी बोली का प्रयोग करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटती थीं।

प्रोटोकॉल पर मोदी ने बताई अहम बात
पीएम ने कहा कि आम तौर पर विदेश मंत्रालय मतलब कोट-पैंट, प्रोटोकॉल इसी के आसपास घूमता है। विदेश मंत्रालय की हर चीज में प्रोटोकॉल सबसे पहले होता है। उन्होंने कहा कि सुषमा जी ने प्रोटोकॉल की परिभाषा को पीपल्स कॉल में परिवर्तित कर दिया। दुनिया में रह रहे किसी भी भारतीय की समस्या मेरी समस्या है, यह विदेश मंत्रालय के चरित्र में परिवर्तन लाना बहुत बड़ा काम था और बेहद कम समय में उन्होंने ऐसा किया। उन्होंने बताया कि एक समय था, आजादी के 70 साल में देश में करीब-करीब 77 पासपोर्ट ऑफिस थे। सुषमा जी के समय में पांच साल में 505 पासपोर्ट ऑफिस उन्होंने शुरू कराए। ये काम सुषमा जी सहज रूप से करती थीं। PM ने कहा कि उम्र में मुझसे छोटी थीं, लेकिन मैं सार्वजनिक रूप से कहना चाहूंगा कि मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता था।

बांसुरी में दिखती है सुषमा की झलक
पीएम ने कहा कि वह (सुषमा) एक उत्तम कार्यकर्ता के रूप में और श्रेष्ठ साथी के रूप में बहुत कुछ देकर गई हैं, बहुत कुछ छोड़कर गई हैं। सुषमा जी नहीं हैं। विरासत और अमानत हमें देकर गई हैं। सुषमा जी की जो ताकत थी, उसकी कुछ झलक मैंने बांसुरी में अनुभव की। जिस प्रकार से सुषमा जी गईं, उस पल को संभालना बहुत मुश्किल काम था लेकिन अपने पिता को संभालना और परिस्थिति को भी संभालना, इसमें बांसुरी में जिस धैर्य और परिपक्वता का अनुभव मैंने किया, वह सुषमा जी लघु स्वरूप हैं। मैं उस बेटी को बहुत आशीर्वाद देता हूं। इस परिवार के दुख में हम सब उनके साथ हैं।

श्रद्धांजलि सभा में पीएम मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी के सीनियर नेता मुरली मनोहर जोशी और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा समेत कई दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। आपको बता दें कि सुषमा स्वराज का छह अगस्त को रात में दिल का दौरा पड़ने से 67 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। स्वराज ने दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। कुछ साल पहले उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि 6 अगस्त को कांग्रेस की बैठक चल रही थी तभी सूचना मिली कि सुषमा जी गंभीर हैं। बैठक में सभी लोगों ने कहा कि पहले उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेनी चाहिए। शर्मा ने बताया कि कुछ समय बाद ही निधन की सूचना मिली। पूरा देश शोक में था, पूरी दुनिया ने श्रद्धांजलि दी। उनका कद भले ही छोटा था, लेकिन उनका व्यक्तित्व और ह्रदय बहुत बड़ा था। मेरी उनके साथ तीखी बहस भी होती थी, लेकिन उनकी बातों में कभी अहंकार और कटुता नहीं होती थी।

एसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि जोहानिसबर्ग में नेल्सन मंडेला की श्रद्धांजलि थी। मैं भी सुषमा जी के साथ गया था। उस समय उनके साथ बातचीत का मौका मिला। उनका व्यवहार बड़ी बहन जैसा था। आज उनके लिए श्रद्धांजलि कर रहे हैं, इसका भरोसा नहीं होता है। मिश्रा ने कहा कि बीएसपी प्रमुख ने खास तौर पर यहां पार्टी की तरफ से श्रद्धांजलि देने मुझे भेजा है।



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