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शहीदों को नमन करने के लिए यहां जाने की बना सकते हैं योजना

नयी दिल्ली/एजेंसी

15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली और हम इस दिन से भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा। जैसा कि सभी जानते हैं कई स्वतंत्रता सेनानियों देश को आजाद कराने में शहीद हो गए। इस स्वतंत्रता दिवस पर इन शहीदों को नमन करने के लिए आप इनके स्मारक पर जा सकते हैं। हम बताते हैं कि आप देश में किन-किन स्थानों पर जाने की योजना बना सकते हैं।

लाल किला, दिल्ली
हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। सन 1947 में जब भारत को आजादी मिली थी, उस दिन देश के पहले पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले से भाषण दिया था। लाल किला अंग्रजों से भारत की आजादी का प्रतीक है। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लाल किले का निर्माण शाहजहां ने करवाया था। लाल रंग के बलूआ पत्थर से बने होने के कारण इसका नाम लाल किला पड़ा।

जलियांवाला बाग, अमृतसर
सन 1919 में जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन स्वतंत्रता सेनानियों ने रॉलेट ऐक्ट में विरोध में एक बैठक की योजना बनाई। इसके बाद जब लोग यहां आए तो बिना किसी चेतावनी के जनरल डायर ने गोली चलाने का आदेश दे दिया। जालियांवाला बाग हत्याकांड में कई सौ लोग शहीद हुए थे। इन शहीद की याद में जलियांवाला बाग में मेमोरियल बनाया गया है। यहां पर दीवारों में बुलेट का निशान देखे जा सकते हैं। इन निशानों को देखकर आप अत्याचार का अंदाजा लगा सकते हैं।

वाघा बॉर्डर, अमृतसर
पंजाब का वाघा बॉर्डर जो भारत और पाकिस्तान को अलग करता है। रोजाना सुर्यास्त से पहले वाघा बॉर्डर पर रीट्रीट सेरेमनी होती है। इस सेरेमनी में भारत और पाकिस्तान के जवान शामिल होते हैं। इसको देखने के लिए दोनों के तरफ काफी संख्या में पर्यटक आते हैं।

सेलुलर जेल, अंडमान निकोबार द्वीप
अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी के रूप में भी जाना जाता है। यह जेल अब एक म्यूजियम और स्मारक बन गई है। सेलुलर जेल में बने म्यूजियम और स्मारक में आने पर आपको अंदाजा होगा कि स्वतंत्रता सेनानियों हमारे देश को आजाद कराने के लिए कितनी यातना सहनी पड़ी।

झांसी का किला, उत्तर प्रदेश
सभी जानते हैं कि झांसी की रानी लक्ष्मी बाई बहुत साहसी योद्धा हुई हैं, जिन्होंने सिर्फ अपने दम पर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। झांसी में एक किला बना हुआ है, जहां आप स्वतंत्रता दिवस पर जा सकते हैं। 17 वीं शताब्दी में झांसी का किला राजा बीर सिंह देव ने बनवाया था। ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लक्ष्मी बाई अपने बेटे को पीठ पर बांधकर वीरता से लड़ीं थीं।

अगस्त क्रांति मैदान, मुंबई
मुंबई का अगस्त क्रांति मैदान में गांधीजी ने 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो का बिगुल फूंका था। यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता में सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से है। आज इस मैदान को गोवली मैदान कहा जाता है। आप स्वतंत्रता दिवस पर इस मैदान को देखने जा सकते हैं।

चंद्रशेखर आजाद पार्क, प्रयागराज
सन 1931 में चंद्रशेखर आजाद प्रयागराज के इस पार्क में ब्रिटिश सैनिकों के साथ लड़े थे। इस पार्क में उन्होंने मात्र 25 साल की उम्र में अपने प्राणों को न्यौछावर किया था। बता दें कि जब चंद्रशेखर आजाद ने ब्रिटिश पुलिस ने घेर लिया। तब उन्होंने सोचा कि ब्रिटिश सैनिकों की गोली से नहीं मरेंगे और उन्होंने खुद को इस जगह पर गोली मार ली। इस जगह को अब चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है। पार्क में चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा लगी हुई है।

साबरमती आश्रम, अहमदाबाद
साबरमती आश्रम से महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह और दांडी मार्च की शुरुआत की थी। साबरती से लेकर दांडी तक के जिस रास्ते से यह जुलूस निकला था वो अब ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। महात्मा गांधी ने वर्ष 1930 में दांडी मार्च शुरू की तो वे इस आश्रम रुके थे। इस स्वतंत्रता दिवस पर आप यहां जा सकते हैं।



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