बिहार

1 लाख करोड़ से अधिक का योजना आकार, 5 माह में महज 7.72 फीसदी राशि ही खर्च

* सुस्ती के लिए सीएफएमएस को जिम्मेदार ठहरा रही राज्य सरकार
* शेष सात माह में 92% काम पूरा करना है, ऐसे में सरकार विभागों पर दबाव बनाने लगी

पटना/संवाददाता

राज्य में योजना आकार भले ही 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, पर मुख्यमंत्री की बार-बार ताकीद के बावजूद विभागों की सुस्ती खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। चालू वित्तीय वर्ष के पांच माह बीत जाने के बाद भी अबतक योजना राशि का मात्र 7.72% हिस्सा ही खर्च हो पाया है।

शेष सात माह में 92% काम पूरा करना है। ऐसे में सरकार विभागों पर दबाव बनाने लगी है। हालांकि, योजना और विकास विभाग खर्च संकट के लिए वित्त विभाग द्वारा इस वर्ष से शुरू की गई सीएफएमएस प्रणाली को जिम्मेदार ठहरा रहा है।वहीं मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि जिलों में काम तो हो ही रहा है, पर आवंटित रकम जारी नहीं होने से खर्च का संकट दिख रहा है। इस माह से समस्या का समाधान हो गया है। अब योजना की आवंटित राशि जिलों में तेजी से जाने लगी हैं। जून या जुलाई तक तो जा ही नहीं पा रही थी।

15 विभाग ऐसे जहां खर्च शून्य
15 ऐसे विभाग हैं, जहां खर्च 0 है। वहीं 6 विभागों में 1% से कम खर्च हुआ है। 2% से कम खर्च करने वाले विभाग 3 हंै। पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना की जाए तो इस समय तक राज्य में 20.56 % राशि खर्च हो चुकी थी। अब सरकार के सामने यह परेशानी खड़ी है कि बचे हुए 7 महीनों में 102 लाख 45 हजार रुपए कैसे खर्च होंगे?

सीपीएफएमएस की नई व्यवस्था वजह से खर्च में परेशानी हुई है। मैंने आज ही इस संबंध में वित्त विभाग से बात की है। कई विभागों के लिए आवंटन भी जारी कर दिया गया है। जल्द ही सभी आवंटित राशि का खर्च कर लिया जाएगा।
– महेश्वर हजारी, मंत्री, योजना



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