विचार विमर्श

फील गुड फैक्टर

हाल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणाओं को मिनी बजट कहा गया। लेकिन सरकार का रुझान अभी हर हफ्ते ही एक मिनी बजट जारी करने का जान पड़ता है। मंदी की बढ़ती आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ऐसे कई फैसले किए गए हैं, जिनसे अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है। बैठक में 60 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए 6,268 करोड़ रुपये की निर्यात सब्सिडी देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया, जो सीधे किसानों के खाते में जाएगी। सरकार 2021-22 तक 75 मेडिकल कॉलेज खोलेगी, जिससे देश में एमबीबीएस की 15,700 सीटें बढ़ जाएंगी।

सबसे बड़े फैसले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में लिए गए हैं। कोयले के खनन और उसकी बिक्री में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी गई है। सिंगल ब्रांड रिटेल को एफडीआई के लिए अधिक आकर्षक बनाया गया है और डिजिटल मीडिया में 26 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दी गई है। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल से ही बेरोजगारी बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। इन फैसलों से सरकार को बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। एकल खुदरा ब्रांड यानी एक ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली विदेशी कंपनियां अब अपना कोई स्टोर खोले बिना ऑनलाइन सामान बेच सकती हैं। पहले कुछ समय तक रिटेल स्टोर से सामान बेच लेने के बाद ही ये ऑनलाइन कारोबार में उतर सकती थीं। 30 फीसदी घरेलू खरीद के नियम में भी उन्हें कुछ छूट दी गई है। ऐसा घरेलू खरीद की परिभाषा आसान बनाकर किया गया है।

विदेशी कंपनियों द्वारा निर्यात के लिए की गई खरीद को भी घरेलू खरीद में शामिल माना जाएगा। उनके नई फैक्ट्री लगाने के पहले और उसके बाद की गई खरीद को भी इसी सीमा में लिया जाएगा। ठेके पर कराई जाने वाली मैन्युफैक्चरिंग के रूप में घरेलू बाजार से जो खरीद होती है, उसे भी घरेलू खरीद ही माना जाएगा। मोदी सरकार ने वैश्विक परिस्थितियों को भांपकर ही एफडीआई के नियमों में इतने खुलेपन की गुंजाइश बनाई है। सरकार अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर का भरपूर फायदा उठाना चाहती है। उसके इन फैसलों से उन कंपनियों को भारत में निवेश का मौका मिलेगा, जिनके लिए चीन में अपना कारोबार चलाना दिनोंदिन मुश्किल होता जा रहा है। ऐसी कंपनियों को भारत में आने का खुला न्योता दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा और काम के मौके बढ़े तो बाजार में नई मांग पैदा होगी। मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला सोशल डिवेलपमेंट के लिहाज से अहम है। फिलहाल देश में 11,082 की आबादी पर मात्र एक डॉक्टर है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह अनुपात प्रति हजार व्यक्तियों पर एक होना चाहिए। नए मेडिकल कॉलेजों से हेल्थ सेक्टर की दशा बेहतर होगी। अर्थव्यवस्था के लिए ये फैसले फील गुड फैक्टर साबित हो सकते हैं।

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