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चांद से बस ‘100 कदम’ दूर अपना चंद्रयान-2

नई दिल्ली/एजेंसी

भारत का स्पेस मिशन (चंद्रयान-2) लगातार अपने लक्ष्य ओर बढ़ रहा है और हर रोज अपने अभियान को पूरा करने की दिशा में सफलतापूर्वक कदम बढ़ा रहा है। रविवार को शाम 06 बजकर 21 मिनट पर चंद्रयान-2 चंद्रमा की पांचवी कक्षा में प्रवेश कर गया है। कक्षा बदलने में इसे 52 सेकंड का वक्त लगा। इसरो ने जानकारी दी है कि सफलतापर्वक सामान्य परिस्थितियों में यह महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया गया है। अब सोमवार को ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम को अलग किया जाएगा।

ISRO के मुताबिक लैंडर विक्रम के चांद पर उतरने से पहले अभी वह चंद्रमा की दो और कक्षाओं में प्रवेश करेगा। इसके बाद 7 सितंबर को विक्रम की चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करवाई जाएगी। बता दें कि चंद्रयान-2 लगातार चंद्राम की अद्भुत तस्वीरें भेज रहा है। 2 सितंबर को लैंडर विक्रम कॉम्पजिट बॉडी से अलग होगा। अभी के अनुमान के मुताबिक 7 सितंबर को दिन में 1:55 पर यह चांद की सतह पर उतरेगा।

बहुत तेज होगा लैंडर विक्रम का सेपरेशन
इसरो के चेयरमैन सिवन के मुताबिक 2 सितंबर को होने वाला लैंडर सेपरेशन काफी तेज होगा। यह उतनी ही गति से होगा जितनी गति से कोई सैटलाइट लॉन्च वीइकल से अलग होता है। इंटिग्रेटेड स्पेसक्राफ्ट को अलग-अलग करने के लिए जरूरी कक्षा असोमवार को स्थिर करने के बाद इसरो कमांड देगा जो ऑनबोर्ड सिस्टम अपने आप एग्जक्यूट करेगा।

कैसे अलग होगा लैंडर
ISRO के एक वैज्ञानिक ने बताया कि ऑसबिटर के ऊपर लगे फ्यूल के एक्सटेंशन में लैंडर और रोवर रखे गए हैं जो कि क्लैंप और बोल्ट से अटैच हैं। उन्होंने बताया कि एक स्प्रिंग के दो तरफ लैंडर और रोवर जुड़े हुए हैं। जिस बोल्ट से स्प्रिंग लगा हुआ है उसे कमांड के जरिए काट दिया जाएगा और लैंडर अलग हो जाएगा।

सॉफ्ट लैंडिंग
7 सितंबर को लैंडर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा और इसके 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान बाहर आएगा जो कि चंद्रमा की सतह पर लगभग 500 मीटर की दूरी तय करेगा। लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत का नाम भी इस उपलब्धि में शामिल हो जाएगा। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था।



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