महिला स्वास्थ्य

बिंदी, सिंदूर, मेहंदी… कहीं आपको कर न दे बीमार

नई दिल्ली/एजेंसी

अगर आप भी बाल कलर करते हैं और हर्बल हेयर डाई का इस्तेमाल कर निश्चिंत रहते हैं तो सजग हो जाएं। एम्स के स्किन डिपार्टमेंट के डॉक्टरों का कहना है कि इंटरनैशनल स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में इस्तेमाल होने वाले इस तरह के हर्बल प्रॉडक्ट्स केमिकल युक्त हैं और इनसे स्किन संबंधी बीमारी हो सकती है। अब एम्स में भी इस पर स्टडी चल रही है। इसमें लगभग 50 ऐसे हर्बल प्रॉडक्टस को शामिल किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ हर्बल मेंहदी ही नहीं, बालों को रंगने वाली अन्य मेंहदी, कॉस्मेटिक क्रीम्स, बिंदी, सिंदूर, कुमकुम, फेयरनेस क्रीम कोई भी पूरी तरह से सेफ नहीं हैं।

आईआईटी रुड़की के साथ कर रहे हैं स्टडी
एम्स के प्रोफेसर डॉ. वी. के. शर्मा ने बताया कि अधिकांश हेयर डाई (मेहंदी) में पीपीडी जैसे केमिकल्स बिना जानकारी दिए मिलाए जा रहे हैं। यह भी नहीं बताया जाता है कि इनकी मात्रा कितनी है। यह बहुत खतरनाक होता है। इसलिए हम आईआईटी रुड़की और एम्स ऋषिकेश के साथ मिलकर यह स्टडी कर रहे हैं। अगले कुछ महीनों में इसका रिजल्ट आ जाएगा। लगभग सभी तरह की हेयर डाई में पांच प्रकार के केमिकल्स होते हैं। इनमें पीपीडी सब में होता है।

बिंदी व सिंदूर भी दे सकता है बीमारी
डॉ. वी. के. शर्मा ने बताया कि सिंदूर या लिक्विड बिंदी, कुमकुम से भी स्किन की बीमारी हो सकती है। सिंदूर की ज्यादातर इंडस्ट्रीज लोकल होती हैं। किसी को नहीं पता कि सिंदूर को लाल बनाने के लिए कौन से केमिकल्स इस्तेमाल होते हैं। जहां तक साइंटिफिक बात है तो ज्यादातर में एजोडाइज जैसे केमिकल होते हैं। शर्मा के अनुसार सेफ तो कोई भी प्रॉडक्ट नहीं है। गिनती के कुछ इंटरनैशनल प्रोडक्ट्स ही हैं जो गाइडलाइंस को फॉलो करते हैं। जहां तक भारत की बात है तो यहां पर कोई रूल एंड रेग्युलेशन नहीं है। सभी अपने अपने हिसाब से केमिकल्स का इस्तेमाल कर रह हैं। इसलिए डर्मेटोलॉजी संगठन ने इसको लेकर काम करने का फैसला किया है, जिसमें सरकार की मदद ली जाएगी और इससे संबंधित कंपनियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

इन प्रॉडक्ट से हो सकती है स्किन की बीमारी
डॉक्टर रीति भाटिया ने बताया कि एम्स में स्किन के इलाज के लिए आए 106 मरीजों पर स्टडी की गई। 74 मरीज चेहरे पर डॉर्कनेस से पीड़ित थे, 24 को एलर्जी थी, बाकी को अन्य दिक्कत थी। 35 पर्सेंट मरीजों में एक बात कॉमन थी कि वे हेयर डाई और फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करते थे। ऐसी क्रीम या डाई का असर स्किन पर होता है तो रंग बदलने लगते हैं। किसी की स्किन लाल तो किसी की काली पड़ जाती है। कई बार तुरंत रिऐक्शन नहीं होता है तो लोगों का ध्यान इस ओर नहीं जाता है।



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