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प्यार का शहर है मांडू, अभी है घूमने का बेस्ट टाइम

नई दिल्ली/एजेंसी

मांडू मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक और बेहद सुंदर टूरिस्ट प्लेस है। इसका पुराना नाम मांडवगढ़ है। यह विंध्याचल की पहाड़ियों की ऊंचाई पर स्थित है। अपने स्वर्णिम काल में इस जगह को खुशियों का शहर भी कहा जाता था। मांडू की सैर के लिए जुलाई से मार्च का समय बेहतर होता है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग तो खासतौर पर मॉनसून में यात्रियों को लुभाने के लिए कई तरीकों से प्रचार करता है।

मांडू में देखने के लिए है बहुत कुछमांडू पहाड़ों और चट्टानों का क्षेत्र है। यहां सदियों पुरानी ऐतिहासिक इमारतें, हमें उस जमाने की गाथा सुनाती हैं। इनमें रानी रूपमति का महल, हिंडोला महल, अशरफी महल और जहाज महल खास हैं। यहां आप वर्ष 1472 में स्थापिक की गई भगवान सुपार्श्वनाथ की प्रतिमा और मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं। मांडू एक प्रमुख जैन तीर्थ भी है। यहां नीलकंठ महल भी है।

रूपमती महल
रानी रूपमती बादशाह बाज बहादुर की पत्नी थीं। रानी मां नर्मदा के दर्शन के बाद ही अन्न और जल ग्रहण करती थीं। कहते हैं कि रानी की इस भक्ति का सम्मान करते हुए बाज बहादुर ने रूपमति महल को इस तरह निर्मित कराया, जहां से रानी जब चाहे तब मां नर्मदा के दर्शन कर सकें।

किलो का शहर
मांडू को दुनिया का सबसे बड़ा किलों का शहर भी कहा जाता है। यहां राजा और रानी का महल इस तरह बना है कि राजा और रानी अपने-अपने महल की प्राचीर पर खड़े होकर एक-दूसरे को देख सकते थे। मांडू शहर चारों तरफ से किले की मजबूत चारदिवारी से घिरा है और बीच में एक से बढ़कर एक नायाब वास्तुकला के नमूने देखने को मिलेंगे।

स्नानागार है बेहद सुंदर
किले और महल की खूबसूरती के साथ ही यहां का स्नानागार इतना सुंदर और भव्य बना है कि आपने शायद ही पहले कभी किसी महल में इतना भव्य स्नानागार और कुंड देखा हो। रानी रूपमती बेहद सुंदर राजपूत राजकुमारी थीं और बहुत अच्छी गायिका भी थीं। उनके गायन और रूप पर मोहित होकर बाज बहादुर ने उनसे विवाह किया और उनके लिए कई इमारतों का निर्माण कराया। उनके प्यार की गर्माहट आप आज भी माडूं में महसूस कर सकते हैं।



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