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भूखा होने पर इंसान बेहतर निर्णय नहीं ले पाता और धैर्य खो देता है

* स्कॉटलैंड की डुंडी यूनिवर्सिटी ने किया शोध, दावा; जो खाना खाकर ऑफिस पहुंचते हैं वे ज्यादा बेहतर फैसले ले पाते हैं
* शोध के मुताबिक, भोजन एक तरह के रिवॉर्ड की तरह जो धैर्य रखना भी सिखाता है

नयी दिल्ली/एजेंसी

वर्कप्लेस पर सही फैसले न ले पाने और धैर्य खोने का कारण भूख भी हो सकता है। स्कॉटलैंड की डुंडी यूनिवर्सिटी के शोध में सामने आया है कि वर्कप्लेस पर इंसान की भूख उसके फैसले लेने की क्षमता को बदल सकती है। ऐसे लोग जो खाना खा खाकर ऑफिस पहुंचते हैं वे बेहतर फैसले ले पाते हैं। शोध में भोजन को एक रिवॉर्ड बताया गया है।

अधिक डाइटिंग भी निर्णय करती है प्रभावित
शोधकर्ता डॉ. बेंजामिन विन्सेंट के मुताबिक, रिसर्च में 50 लोगों को शामिल किया गया है और उनसे खानपान, पैसे और रिवॉर्ड से जुड़े सवाल पूछे गए। उनसे दो बार सवाल पूछे, जब वो भूखे थे और खाना खिलाने के बाद। शोध में सामने आया कि जिन लोगों सामान्य रूप से खाना खा रहे थे उन्होंने अपने रिवॉर्ड को दोगुना करने के लिए 35 दिन तक इंतजार किया। वहीं, जिन्होंने खाना नहीं खाया उनका सब्र 3 दिन में ही टूट गया।

शोधकर्ताओं का कहना है, रिसर्च का लक्ष्य था कि भूखे रहने पर इंसान कैसे और क्या सोचता है। नतीजे के रूप में सामने आया है कि भूख इंसान की प्राथमिकता को बदल देती है। जिसका सीधा असर निर्णय लेने की क्षमता पर होता है। यह रिसर्च बच्चों पर भी लागू होती है।

अक्सर बच्चे स्कूल जाते समय ब्रेकफास्ट नहीं ले पाते, कई लोग कैलोरी कम करने के लिए डाइटिंग करते हैं। वहीं, कुछ लोग अधिक व्रत रखने में यकीन रखते हैं। लेकिन उनकी इस आदत का असर भविष्य में देखा जा सकता है। जो उत्सुक बनाने के साथ उनके निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित करता है।



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