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1994 के बाद हुई इतनी ज्यादा बारिश

हाइलाइट्स
* मौसम विभाग के मुताबिक इस बार सामान्य से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है और 1994 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है
* विभाग के मुताबिक देश में 88 सेमी वर्षा दर्ज की गई, अब भी कई राज्यों में बारिश जारी है
* सौराष्ट्र में सामान्य तौर पर 1 सितंबर तक ही बारिश होती थी लेकिन इस बार 10 अक्टूबर तक बारिश का अनुमाना है
* 1917 के बाद दूसरी बार अगस्त महीने में इतनी बारिश देखी गई है

नई दिल्ली/एजेंसी

इस साल का मॉनसून सीजन खत्म हो गया है लेकिन बारिश ने कई रेकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सितंबर महीना बीतने के बाद भी उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश जारी है और नदियां उफान पर हैं। सामान्य तौर पर आधे सितंबर के बाद इतनी ज्यादा बारिश नहीं देखी जाती है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार बारिश ने पिछले 25 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। इससे पहले 1994 में इतनी बारिश हुई थी। मौसम विभाग के कुल 36 सब डिविजन्स में 12 में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई जबकि 19 में नॉर्मल बारिश रेकॉर्ड हुई। इस बार देश में 88 सेंटीमीटर बरसात रेकॉर्ड की गई है। बता दें कि अब भी उत्तर प्रदेश और बिहार में बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और दोनों राज्यों में बारिश के कारण लगभग 129 लोगों की मौत हो गई है।

दक्षिण-पश्चिम भारत की बात करें तो इस बार 10 अक्टूबर तक बारिश होने की संभावना है जबकि सामान्य तौर पर यहां 1 सितंबर के बाद भारी बारिश नहीं होती है। 2007 में 30 सितंबर तक बारिश हुई थी लेकिन इस बार 1961 के बाद पहली बार इतने ज्यादा दिनों तक बारिश देखी जा रही है। 1961 में भी मॉनसून के लौटने की तारीख 1 अक्टूबर थी।

इस बार बरसात के मौसम में उत्तर-पूर्व, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ा। अब भी गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार बाढ़ के हालात से जूझ रहे हैं। 1994 के बाद इस साल बारिश का लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) सामान्य का 110% है। 2001 के बाद नॉर्थ ईस्ट में इस बार इतनी बारिश देखी गई है। हालांकि 2007 में भी उत्तर-पूर्व में भारी बारिश हुई थी।

1996 के बाद पहली बार अगस्त में इतनी बारिश हुई है। इसके अलावा 1917 के बाद सितंबर में दूसरी बार इस कदर बरसात देखी गई। मौसम विभाग के मुताबिक जुलाई और अगस्त में हुई बरसात अनुमान से ढाई गुना ज्यादा है। इस बार मौसम विभाग ने केरल तट पर मॉनसून पहुंचने की तारीख 6 जून बताई थी जबकि यह आठ जून को तट पर पहुंचा था।



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