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आरे में पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

हाइलाइट्स
* मुंबई में आरे जंगल की कटाई के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
* स्टूडेंट्स के प्रतिनिधिमंडल के द्वारा लेटर लिखे जाने के बाद सर्वोच्च अदालत ऐक्टिव
* सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर सोमवार को सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन किया
* लॉ स्टूडेंट्स के पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका में किया तब्दील
* आरे में 2700 पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं पर्यावरणविद और ऐक्टिविस्ट

मुंबई/नई दिल्ली/एजेंसी

देश की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट्स की ओर से पेड़ों को काटने के विरोध में लिखे गए लेटर को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई की बात कही है। कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन भी कर दिया है। रविवार सुबह ही लॉ स्टूडेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखकर मामले पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। पिछले कई दिनों से पर्यावरण प्रेमी और कार्यकर्ता मेट्रो शेड के लिए सैकड़ों की संख्या में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के वैकेशन ऑफिसर की ओर से इस बारे में सूचना दी गई है कि लॉ स्टूडेंट ऋषभ रंजन की ओर से लेटर लिखा गया था। इसमें बताया गया था कि मुंबई के आरे के जंगल में पेड़ काटे जा रहे हैं। इस बारे में लिखे गए लेटर को जनहित याचिका के तौर पर रजिस्टर्ड कर लिया गया है और सोमवार को सुबह 10 बजे सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में दाखिल अर्जी को खारिज कर दिया था। आरे में कुल 2700 पेड़ काटे जाने की योजना है, जिनमें से 1,500 पेड़ों को गिरा दिया गया है।

पर्यावरण ऐक्टिविस्ट्स ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाई कोर्ट ने ऐक्टिविस्ट्स से चीफ जस्टिस का दरवाजा खटखटाने को कहा था। वहीं, मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भी शनिवार को आरे कॉलोनी में पेड़ों को काटने से पहले नई नोटिस जारी करने के पर्यावरण कार्यकर्ताओं के दावे को खारिज कर दिया। विरोध प्रदर्शन तेज होता गया तो पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि गिरफ्तार पर्यावरणविदों को रविवार को जमानत दे दी गई। पेड़ों की कटाई के खिलाफ प्रदर्शन करने के मामले में छह महिलाओं सहित 29 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

जानें, क्या है आरे में पेड़ काटने का मामला
दरअसल मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है। आरे में करीब 2,500 पेड़ मेट्रो कॉरिडोर के रास्ते में आ रहे हैं। मेट्रो ने इन्हें काटना शुरू किया है, जिस पर स्थानीय लोगों समेत देश भर के पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। यही नहीं राज्य में सत्ताधारी बीजेपी के साथ गठबंधन में शामिल शिवसेना ने भी इसका विरोध किया है। शिवसेना की युवा शाखा के चीफ आदित्य ठाकरे ने भी इसका विरोध किया है।। पेड़ों के काटे जाने पर चिपको मूवमेंट जैसा आंदोलन शुरू करने की कोशिशें हुई थीं, लेकिन सरकार ने धारा 144 लागू कर इसे कुचल दिया।

नेहरू ने रखी थी आरे कॉलोनी की नींव
4 मार्च 1951 को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पौधारोपण करने के साथ आरे कॉलोनी की नींव रखी थी। पेड़ों से ढका यह इलाका 3166 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इस इलाके को मुंबई के फेफड़ा के नाम से भी जाना जाता रहा है।

केंद्र सरकार ने दिया दिल्ली मेट्रो का उदाहरण
आरे में पेड़ों को काटे जाने का बचाव करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली मेट्रो का उदाहरण दिया था। उन्होंने कहा था, ‘दिल्ली में मेट्रो आज दुनिया में सबसे अच्छी मेट्रो है। बाहर के देशों के लोग यहां आकर मेट्रो को देखते हैं कि इसका विकास कैसे हुआ। जब पहला मेट्रो स्टेशन बना तो 20-25 पेड़ गिराने की जरूरत थी, तो लोगों ने इसका विरोध किया लेकिन एक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाए गए और पिछले 15 साल में पेड़ बड़े हो गए हैं। वहां 271 स्टेशन बने, दिल्ली का जंगल भी बढ़ा, पेड़ भी बढ़े और दिल्ली में तीस लाख लोगों के लिये सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था हुई। मतलब यही है कि विकास भी और पर्यावरण की रक्षा भी, दोनों साथ में हुए।’

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