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प्रदूषण पर विदेश में स्पीच, केजरी को केंद्र की ना

हाइलाइट्स
* विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने से दिल्ली के सीएम केजरीवाल का डेनमार्क दौरा रद्द
* अरविंद केजरीवाल को मंगलवार को दोपहर 2 बजे दिल्ली से डेनमार्क के लिए होना था रवाना
* डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में C-40 क्लाइमेट समिट में दिल्ली में पलूशन कम करने के अनुभव पर बोलना था
* यात्रा को मंजूरी न मिलने पर भड़के AAP सांसद संजय सिंह, बोले- अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जाएगा गलत संदेश

नई दिल्ली/एजेंसी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को डेनमार्क में क्लाइमेट चेंज पर एक बैठक में शामिल होने के लिए जाना था। इसके लिए मंगलवार दोपहर को उन्हें रवाना होना था लेकिन विदेश मंत्रालय से उन्हें राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली। नतीजतन अब केजरीवाल डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में होने वाली C-40 क्लाइमेट समिट में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री फरहाद हाकिम को इसके लिए हरी झंडी दे दी है। आम आदमी पार्टी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गलत संदेश जाएगा।

नियम के मुताबिक राजनीतिक मंजूरी होती है जरूरी
नियम के मुताबिक किसी भी जनप्रतिनिधि, मंत्री, मुख्यमंत्री, नौकरशाह को विदेश में किसी भी मंच पर देश के रुख या सरकार की नीतियों के बारे में बात करने के लिए विदेश मंत्रालय से पॉलिटिकल क्लियरंस लेनी पड़ती है।

मंजूरी न मिलने से भड़की AAP
आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल की डेनमार्क यात्रा को विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डेनमार्क में छुट्टियां मनाने नहीं जा रहे थे। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह डेनमार्क में C-40 क्लाइमेट समिट में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। सिंह ने कहा कि इससे वैश्विक मंच पर भारत की छवि प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गलत संदेश जाएगा।

केजरीवाल को मंगलवार दोपहर 2 बजे दिल्ली से होना था रवाना
आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि डेनमार्क में होने वाली क्लाइमेट समिट में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली के सीएम को विदेश मंत्रालय की तरफ से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिली। केजरीवाल को समिट के लिए 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना था। सूत्रों ने बताया, ‘मुख्यमंत्री मंगलवार दोपहर को दिल्ली से उड़ान नहीं भर पाएंगे क्योंकि विदेश मंत्रालय ने उन्हें डेनमार्क दौरे के लिए पॉलिटिकल क्लियरंस नहीं दिया है।’

दिल्ली में एयर पलूशन कम करने के अनुभव पर बोलना था
क्लाइमेट समिट में केजरीवाल को दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को कम करने के AAP सरकार के अनुभव और दूसरे मुद्दों पर बोलना था। केजरीवाल की प्रस्तावित डेनमार्क यात्रा को लेकर पूछे गए मीडिया के सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ्ते कहा था कि किसी मुद्दे पर फैसला लेते वक्त तमाम इनपुट्स का ध्यान देना पड़ता है।

पिछले हफ्ते दौरे से जुड़े सवाल को टाल गए थे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था, ‘मैं राजनीतिक मंजूरी से जुड़े सवाल का जवाब नहीं दूंगा। हमें हर महीने मंत्रालयों, सचिवों, नौकरशाहों से पॉलिटिकल क्लियरंस के लिए सैकड़ों आवेदन मिलते हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘में कुछ इनपुट मिशन से हासिल होते हैं और हमें इस पर ध्यान देना होता है कि संबंधित व्यक्ति किस तरह के कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहा है। इसके अलावा हम यह भी देखते हैं कि उस कार्यक्रम में अन्य देशों की शिरकत का स्तर कैसा है और किस तरह का निमंत्रण दिया गया है। ‘

बता दें कि 22 सितंबर को एक आधिकारिक बयान में दिल्ली सरकार ने बताया था कि मुख्यमंत्री को डेनमार्क में क्लाइमेट समिट को संबोधित करना है। उसमें वह शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के सरकार के अनुभव पर बोलेंगे। बयान में यह भी कहा गया था कि मुख्यमंत्री वर्तमान में AAP सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी बात करेंगे, जिससे दिल्ली में वायु प्रदूषण में 25 प्रतिशत की कमी आई है।

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