महानदी बौराई : सरिया बरमकेला के कई गांव डूबे…चंद्रपुर, सारंगढ़, डभरा, हुए जलमग्न…

रायगढ़ । वर्तमान भारत।

रितेश सिदार की रिपोर्ट


रायगढ़ । विगत 4 रोज से हो रही मूसलाधार बारिश से अंचल में भीषण बाढ़ के हालात बन गए हैं। गंगरेल से पानी छोड़े जाने के कारण महानदी उफान पर है। ऐसे में सरिया-बरमकेला के कई गांव डूबने से लोग दहशत में रतजगा करने मजबूर हैं। वहीं, सारंगढ में भी पानी – पानी होने से बिलासपुर मार्ग बंद हो गया है। पोरथ मन्दिर महानदी के आगोश में है तो लात नाला का जल स्तर बढ़ने से चन्द्रपुर-बरमकेला मार्ग में 3 रोज से आवागमन अवरुद्ध है । बाढ़ के हालात को देख प्रशासन भी हाई अलर्ट मोड में रहकर तटवर्ती क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को राहत शिविर में शिफ्ट कराते हुए राहत और बचाव कार्य में जुटी है।

नगर सैनिकों की तैराक टीम भी डुबान इलाके में मुस्तैद है। वहीं, रायगढ़ के खर्राघाट, कयाघट और मरीन ड्राइव के जलमग्न होने से शहर में यातायात का दबाव बढ़ गया है तो गर्ल्स कॉलेज और गुजराती पारा के साथ कई वार्ड में पानी के घुसपैठ से जनजीवन प्रभावित है। मौसम विभाग की मानें तो रायगढ़ , राजधानी रायपुर , जांजगीर – चाम्पा , बस्तर , दंतेवाड़ा सहित 14 जिलों में 15 अगस्त को भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पिछले 3 दिन से आसमान से आफत बनकर बरस रही पानी ने सबकुछ पानी – पानी कर दिया है। महानदी के बौराने से रायगढ़ का जांजगीर-चाम्पा और सारंगढ़ से सम्पर्क टूट गया है।

दर्जनों जगह टापू में तब्दील हो गए हैं। धार्मिक नगरी चन्द्रपुर में तो पानी घुसने से नगर पंचायत कार्यालय, हॉस्पिटल, पुलिस कॉलोनी और बिजली ऑफिस समेत कई वार्ड जलमग्न हो गए हैं। चन्द्रपुर को जोड़ने वाली गोपालपुर- हीरापुर मार्ग भी अवरुद्ध है।

चन्द्रपुर से सरिया बरमकेला रुट भी बाधित है। रायगढ़ से सरिया होकर सारंगढ़ जाने वाले मार्ग पर लात नाला के आसपास के इलाके भी डूब चुके हैं। महानदी के रौद्ररूप को देख प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर चन्द्रपुर पुल से आवाजाही बन्द करा दिया – सारंगढ़ की एसडीएम मोनिका वर्मा ने बताया कि महानदी से लगे सरिया के पोरथ, विश्वासपुर, ठेंगागुड़ी, टोरो, रोबो समेत 8 गांव डूब गए हैं तो सरिया, लुकापारा, भीखमपुरा और सांकरा सहित 7 जगह राहत शिविरों में प्रभावित लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है।

दरअसल, महानदी में गंगरेल से पानी छोड़ने के कारण सराईपाली और बसना तरफ से पानी आता है जो जाम होकर टिमरलगा एवं लातनाला सहित इर्द गिर्द क्षेत्र में फैलते हुए बाढ़ का रूप धर लेता है। महानदी के तटवर्ती इलाके में बसे गांव भी इसकी चपेट में आकर प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि जिले में बाढ़ के खतरे को देख कलेक्टर रानू साहू प्रशासनिक अमले के साथ राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। बताया जाता है कि प्रशासन द्वारा तटवर्ती इलाके में राहत शिविर लगाते हुए प्रभावित परिवार को सुरक्षित रखने का अभियान जारी है। यही नहीं , नगर सैनिक के तैराकों की 3 टीम भी बनाई गई है जो सारंगढ़ , सरिया एवं बरमकेला में तैनात है।

चंद्रपुर-बरमकेला मार्ग भी 3 रोज से बंद


लातनाला में लगातार हो रही पानी की आवक के कारण से यहां 5 फीट से अधिक पानी में डूबा हुआ है। यह पुल बीते 3 रोज से जलमग्न है। महानदी में समाहित होने वाले लातनाला में पानी की लगातार आवक से यहां बाढ़ के हालात बन चुके हैं । इस पुल पर 5 फीट से अधिक पानी आने के बाद नाव वालों की मदद से लोग आवागमन करने मजबूर हैं। मोटर सायकल और क्षेत्रवासियों को नौका में बैठाकर पार कराया जा रहा है।

खर्राघाट, कयाघाट, मरीन ड्राइव और पैटू डबरी नाला डूबा


आसमान से आफत बनकर बरसे बदरा ने रायगढ़ शहर में भी खूब त्रासदी मचाई। लैलूंगा के ऊपरी क्षेत्र में जमकर बरसात होने से केलो नदी भी बौराई रही। नतीजतन खर्राघाट और कयाघाट रपटा डूबा रहा तो मरीन ड्राइव के जलमग्न होने के कारण हेमू कालाणी चौक से कलेक्ट्रेट रोड जाने वालों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी। हालांकि , नया शनि मंदिर रोड खुला रहा तो आवाजाही बढ़ने से ट्रैफिक प्रेशर भी रहा। वहीं , झमाझम बरसात से गुजराती पारा में पैठू डबरी के उफान मारने से प्रदूषित पानी लोगों के घर तक जा घुसा , जिससे प्रभावित परिवार को काफी द्विच तें भी झेलनी पड़ी।

जे. ऍम. जे. हाउस्पिटल हुआ जलमन्न ,पहाड़ी पानी ने आशीर्वादपुरम की बिगाड़ी सूरत


वैसे तो थम-थमकर हुई बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है, क्योंकि कई कच्चे मकान धराशायी हुए तो कई मोहल्लों में बरसाती पानी अपने साथ तकलीफें भी लेकर आई। ऐसा ही कुछ शहर के वार्ड क्रमांक 6 स्थित आशीर्वादपुरम कॉलोनी में भी हुआ। दरअसल, पहाड़ से बहकर पूरे रफ्तार के साथ नीचे आई बरसाती पानी ने आशीर्वादपुरम के रोड से होते हुए कई मकानों में इस कदर घुसपैंठ किया कि लोगों की जान सांसत में आ गई। कॉलोनी के रोड किसी नाले की तरह दिख रहा था। पहाड़ी पानी के खतरनाक वेग को देख सहमे लोगों ने पार्षद और प्रशासन को फोनकर मदद की मांग भी की वहीं, जब पहाड़ी पानी कॉलोनी से निकला, तब कहीं जाकर दहशतजदा लोगों ने राहत की सांस ली।

हजारों एकड़ फसल डूबा पानी में


सारंगढ़-बिलासपुर रोड़ में शिवरीनारायण पुल में पानी आने के कारण से आवागमन बंद है। जबकि, सारंगढ़-रायगढ़ रोड़ के टिमरलगा में बीती रात सड़क के ऊपर पानी आने के कारण से आवागमन सुबह तक बंद होने की है। चंद्रपुर से बरमकेला मार्ग पर लातनाला तो 3 रोज से बंद है। ऐसे हालात में बारिश को लेकर रेड्जोन की चेतावनी है जिसके कारण से हालात और भी बिगड़ सकते हैं। वही राहत भरी बात यही है कि हीराकुंड़ बांध के कई गेट खोले गए हैं जिसके कारण बाढ़ के पानी के जल्द उतरने के आसार हैं। बताया जाता है कि लगभग 97 प्रतिशत जलभराव वाले गंगरेल बांध मे लगातार हो रही पानी की आवक को देखते हुए 20 से अधिक गेट छोड़ दिया गया है। इसके कारण महानदी में काफी तेजी से जलस्तर बढ़ता जा रहा है।

वही सारंगढ़ अंचल में लगातार हुई मूसलाधार बारिश से नालो में पानी की प्रचुरता काफी ज्यादा है। क्षेत्र के छोटे नालों का पानी महानदी में जाकर समाहित होता है, किन्तु गंगरेल बांध से पानी छोड़ने के कारण पहले से ही महानदी में पानी का प्रवाह काफी तेज है। ऐसे में महानदी में समाने वाले लातनाला का पानी टिमरलगा में ठहर गया है और खदानों में शत-प्रतिशत पानी भराव होने के बाद अब पानी उल्टा होकर बीच बस्ती में अपनी जगह तलाश रहा है, नतीजतन टिमरलगा में बाढ़ का घुसपैठ शुरू हो गया है। महानदी के रौद्र रूप से नदी के तटीय इलाकों में पानी के कहर से सारंगढ़ अंचल के दर्जन भर से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आने से लगभग एक हजार एकड़ से अधिक का फसल जलमग्न हो गया है ।

सारंगढ़-बिलासपुर हाईवे में आवागमन हुआ अवरुद्ध

सारंगढ़ से बिलासपुर को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे भी शिवरीनारायण के पहले घटमड़वा के पास पुल पर 5 फीट से अधिक पानी आने के कारण से रविवार सुबह से ही बंद है । शिवरीनारायण पुल पर भी पानी आने के कारण से आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध है । गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने के कारण से शिवरीनारायण स्थित महानदी पुल पर पानी एक फीट से अधिक आ चुका था। ऐसे में सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया है, किन्तु गिधौरी के पास घटमड़वा में पानी का जमावड़ा होने से यहां पुल के ऊपर 5 फीट से अधिक पानी आने के कारण से यह रोड़ ही बंद हो गया है।

गर्ल्स कॉलेज में घुटनों तक भरा


पानी गर्ल्स कॉलेज यानी किशोरी मोहन त्रिपाठी महिला महाविद्यालय की व्यवस्था की इस बरसात ने भी कलई खोलकर रख दी। रविवार को नैक मूल्यांकन होने के चलते गर्ल्स कॉलेज खुला था। प्रोफेसर और कर्मचारी जब कॉलेज पहुंचे तो वहां तालाब का नजारा देख एकबारगी वे आवक रह गए। फिर भी जब वे पानी से होते हुए कॉलेज भवन पहुंचे तो घुटने भर तक जल भराव हो चुका था। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान 1983 से स्थापित गर्ल्स कॉलेज में बरसाती पानी के भरने की समस्या का आज तक स्थायी निदान नहीं होना चिंतनीय विषय है। तकरीबन 40 साल से हालात के जस का तस होना बताता है कि कॉलेज को अस्थायी तालाब बनने से बचाने के लिए ईमानदारी से पहल नहीं हुई, जिसका खमियाजा छात्राओं और महाविद्यालय प्रबन्धन को उठाना पड़ता है।