विमर्श समालोचना

जीवन का पूरा मजा लेने वाली जेनरेशन

लेखक : संजय कुंदन आजकल समाज और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में एक शब्द बार-बार आ रहा है- मिलेनियल्स। इसका आशय उस पीढ़ी से है, जो 1990 से 2000 के बीच पैदा हुई। यानी 20 से 30 वर्ष के नौजवान। ये जीवन के अहम पड़ाव पर हैं और ये ही देश के भावी कर्णधार हैं। देश […]

विचार विमर्श

दुनिया देखें मगर

विदेश यात्रा को लेकर बढ़ता आकर्षण हमें अपने इर्दगिर्द भी दिख रहा है लेकिन रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों ने बाकायदा इसकी पुष्टि कर दी है। इन आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून महीने में ही देशवासियों ने 59.6 करोड़ डॉलर (करीब 4000 करोड़ रुपये) विदेश यात्रा पर खर्च किए हैं जो पिछले साल इसी […]

विमर्श समालोचना

मोदी-शाह ने असंभव को संभव कर दिखाया

लेखक : अरुण जेटली (लेखक बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं) संसद का वर्तमान सत्र उपलब्धियों की दृष्टि से अत्यंत सफल रहा है। इसमें कई ऐतिहासिक विधेयक पारित किए गए हैं। तीन तलाक कानून, आतंक पर कठोर प्रहार करने वाले कानून और अनुच्छेद 370 पर निर्णय। ये सभी निश्चित तौर पर अप्रत्याशित हैं। यह आम धारणा […]

विमर्श समालोचना

बंद के दिन कुछ ज्यादा ही खुल जाता है भारत

लेखक : स्व. शरद जोशी और कहीं का पता नहीं, मगर हमारे मालवा में एक एकादशी होती रही है, जिसे कहते हैं देवसोनी एकादशी। बचपन में सुनता था कि उस एकादशी को देवता सो जाते हैं और फिर चार महीने तक सोए रहते हैं। जो भी शुभ काम करना होता था, उस एकादशी के पहले […]

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कांग्रेस की मजबूरी

सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने से कांग्रेस में करीब दो महीने से चला आ रहा गतिरोध फिलहाल समाप्त हो गया है लेकिन पार्टी के सामने मौजूद सारी चुनौतियां आज भी ज्यों की त्यों हैं और उनका समाधान खोजने के लिए ज्यादा वक्त उसके पास नहीं है। पार्टी की असल मुश्किल यह है कि […]

विमर्श समालोचना

नियम की आड़ में क्रिकेटरों की बेइज्जती

लेखक : मनोज चतुर्वेदी भारतीय क्रिकेट के पिछले दो दशकों के दिग्गजों की बात करें, तो सबसे पहले सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली का नाम जेहन में आता है। भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दिलाने में इस चौकड़ी की अहम भूमिका रही है। पर आजकल यह चौकड़ी ‘हितों के टकराव’ के […]

विचार विमर्श

कर्ज का मजा

यह जानकर कुछ लोगों को हैरानी हो सकती है कि देश के शहरी युवा अपनी शादी के लिए सबसे ज्यादा लोन लेते हैं। डिजिटल लेंडिंग प्लैटफॉर्म ‘इंडियालेंड्स’ के एक सर्वेक्षण में इसका खुलासा हुआ है। यह सर्वेक्षण उसने आज मनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में किया है। इसके लिए उसने दिल्ली, मुंबई, […]

विमर्श समालोचना

अंग्रेज चले गए लंदन छोड़ गए

सुधीर मिश्र in खुले मन से अकबर इलाहाबादी साहब का शेर है- मरऊब हो गए हैं विलायत से शेख-जी अब सिर्फ मना करते हैं देसी शराब को मरऊब मतलब प्रभावित होना। शायर के निशाने पर कोई शेख साहब हैं। शायद, विलायत से लौटने के बाद उनके नाज-नखरे बढ़ गए होंगे। लिहाजा, शायर के निशाने पर […]

विमर्श समालोचना

कला के दो विपरीत ठिकाने और बारिश

लेखक : ओमा शर्मा झमाझम होती बारिश का उस रोज हुए कला के दो नितांत अलग या कहें परस्पर विरोधी अनुभवों से कोई रहस्यमय ताल्लुक रहा होगा, इसीलिए इन दिनों मुंबई में होती बारिश मुझे उस घटना की याद दिलाती है। कथाकार-चित्रकार मित्र प्रभु जोशी की दो रोज पहले ही प्रदर्शनी संपन्न हुई थी। बची […]

विमर्श समालोचना

जैसे-जैसे सुलझते हैं, दिलचस्पी बढ़ाते हैं ब्रह्मांड के रहस्य

चंद्रभूषण in नजरबट्टू जैसे हमारे सौरमंडल में सारे ग्रह सूरज के इर्दगिर्द एक ही दिशा में घूमते हैं, उसी तरह हमारी आकाशगंगा में सारे तारे भी इसके केंद्र की एकदिश परिक्रमा करते हैं। लेकिन इस किस्से में आगे एक बड़ा झोल आता है। हम जैसे-जैसे सूरज से दूर जाते हैं, ग्रहों की रफ्तार कम होती […]